ये महिलाएं भाजपा महिला मोर्चा की सदस्या हैं। सामने बैठे हैं शिमला के विधायक व भाजपा के सदस्य श्री सुरेश भारद्वाज।
ये महिलाएं क्या कर रही हैं?
गाना गा रही हैं।
कौनसा गाना?
ऐ मालिक तेरे बन्दे हम, ऐसे हो हमारे करम।।।।
अब ये सोचने वाली बात है कि जिस तरह का माहौल बना है और जिस स्थिति में ये महिलाएं?
खड़ी हैं, उस से तो यही प्रतीत होता है कि ये भारद्वाज जी मालिक हैं, और उन्ही से ये गुहार लगा रही हैं कि उनके कर्मों पर अपनी रहमो करम नज़र बनाए रखें।

वैसे ये अवसर एक वृक्षारोपण का है। वृक्षारोपण कराया संत ज़विएर स्कूल, संजौली, शिमला, के छात्र-छात्राओं ने, और वाह वाही लूटी भाजपा की महिला मोर्चा ने। खैर ये सुअवसर देखने का मौका मिला, क्यूंकि ये वनमहोत्सव बिलकुल मेरे घर की बगल में मनाया गया। मैंने अपना कैमरा निकला और जुट गया काम पे। मोर्चा की महिलाओं ने समझा कि मैं किसी अखबार का छाया संवाददाता हूँ, तो हो गयी गुजारिश शुरू, “आप हमारा फोटू लीजिये, अखबार में हमारा फोटू भी आना चाहिए। आप उनका भी फोटू लीजिये।”
और स्कूली बच्चे?

उन्हें कौन पूछे। वे तो वहाँ ताली बजाने आये थे। खैर किसी को याद आया कि बच्चों ने अपने साथ नए पौधों पर लगाने के लिए नाम पटिका ला राखी हैं, तो उन्हें भी कुछ पौधे थमा दिए गए। और जो बिचारे नहीं लगा पाए, उन्हें काम सौंपा गया – पौधों को पानी देने का।
वैसे नेताजी ने अच्छा भाषण दिया, पर अफ़सोस यह कि भाषण सुनने के लिए केवल भाजपा महिला मोर्चा ही थी। बच्चों को वा[पिस कक्षाओं में पहले ही भेज दिया गया था।
नेताजी – भारद्वाजजी – ने देवदार के पेड़ों का महत्त्व समझाया और कहा कि ये बेमौसमी बरसात व साल-दर-साल कम होती बर्फ, पेड़ों के कम होने का नतीजा है। काश ये सब सुनने के लिए स्कूल के बच्चे होते, क्यूंकि, महिला मोर्चा का उद्देश्य तो केवल अखबार के पृष्ठ पर आना था, और भारद्वाज जी को अपना मालिक बताकर उन्हें प्रसन्न करने की चेष्टा थी।

इस वन महोत्सव का एक फायदा यह भी हुआ कि मेरे घर के पास काफी सफाई हो गयी। पर अफ़सोस, मंत्रीजी के पीठ पलटते ही, नाम पटिकाएं गायब हो गयी, और पौधों की तरफ किसी ने भी मुड़ कर नहीं देखा, कि वे जिंदा हैं, या उन्हें पानी की आवश्यकता है या नहीं। न ही स्कूली बच्चों में उन पेड़ों के प्रती कोई भावना जागृत की गयी।
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Bhigi Billi ji,
A nice write up. Imaginative and educating. You have pin pointed the problem. Most of the time, the effort is limited to the function itself. Nobody cares about the real issue at hand! There is no accountability, at all. The day we get over this attitude, India will really progress.