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Author: Dhaleta Surender Kumar

कविता

बनारस का राजा 

कपिल का श्राप है ये कोरोना न समझो। भय काहे का जब बनारस का राजा हमारा है मोक्षदाता। राजा हमारा भागीरथ इक्ष्वाकु वंशज 60,000 शवों को गंगा में प्रवाहित कर मुक्ति प्रदान कर गया।।
कविता

क्या मसला था बुरास को होंठो पर? 

क्या मसला था बुरास को होंठो पर? क्या निचोड़ा था बादलों को गालों पर? सिलता काजल, खिलता सिंदूर झंझरी ओढ़नी से छनता नूर काफल सी दंत-कथाएँ बाँचती रात रती की व्यथाएँ। आ चलें उन बादलों पे एक बार फ़िर। चाँदनी में नहाने को एक बार...
कविता, जीवन

ए कुंभकर्ण! 

ए कुंभकर्ण चल उठ। आँखे खोल देख उधर श्मशान मैदान में कुम्भ मेला लगा है! मेले में कोरोना आया है। कफ़न अर्थी खेल खिलौने लाया है! ए कुंभकर्ण चल उठ कुम्भ मेला लगा है!
कविता, राजनीति

फ़कीर है वो? 

बढ़ी दाड़ी, उजड़े बाल एक फ़कीर है वो कोई राजा नहीं चल बैठा है झोला उठाकर।। जलते मास की सुगंध है हवाओं में। आज श्मशान रौशन है चिताओं की कमी नहीं।। फ़कीर नहीं, साधक है वो चला है वो शव-साधना को। छप्पन इंच की छाती...
कविता, स्त्री

कोई जा कर कह दो बीबी से मेरी 

कोई जा कर कह दो बीबी से मेरी, रज़ाई में कुछ उल्टा सीधा नहीं होता। चंदे की छपाई, गिलाफ़ की रंगाई, वो दोनों तरफ़ से बराबर गर्म होती है।। वो दोनों तरफ़ से बराबर पानी सोखता है, बराबर तन ढकता है। तौलिये के सीवन में,...