Yoga Day: Why this antagonism
So I read this article on HT: “Five reasons why I didn’t participate in the Yoga Day celebrations“. This cacophony reminds me of a line I read in some book long time back. The book may not that be great, but the line certainly is....
विश्व गुरु
विश्व गुरु का स्वप्न संजोए पक्षीराज बन बैठा है। विष्णु वाहन बनते बनते शव वाहन बन ऐंठा है।। क्या कहा? मानव शव? कद्रु पुत्र का खेला पात्र। चुन चुन कर मुक्त किया पक्षीराज पुराण पढ़ो मात्र।।
क्या जय हनुमान बोलने से कोरोना भाग जाएगा?
पिछले कई दिनों से इंटरनेट पे एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ औरतें एक कोविड मरीज़ का ऑक्सीजन मास्क हटा कर, उस तड़पते हुए मरीज़ के हाथ-पाँव पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से “जय हनुमान” पढ़ रही हैं। वे डॉक्टर की हिदायत की भी अवहेलना कर...
लूण-लोटा वाली घटिया राजनीति
विश्वास नहीं होता कि आज का पढ़ा लिखा नवयुवक, बीसवीं शताब्दी की कुंठित, दबाव वाली – “लूण-लोटा” वाली घटिया राजनीति खेलते हैं। ऐसी राजनीति से बचें। ये राजनीति, भारत के संविधान द्वारा दिए गए मेरे “गुप्त मतदान” के अधिकार के खिलाफ़ है। मुझे दुःख होता...
कोरोना काल में थूकने की आदत – २
“तुम्हें क्या तकलीफ है?” ये जवाब था एक युवक का जो शायद 26-28 साल से ज़्यादा उम्र का है। ये नौजवान संजौली चौक पे थूकता हुआ पाया गया और इसका ये जवाब मेरे टोकने पर था: “पब्लिक में क्यूँ थूक रहे ह “मुझे क्या तकलीफ...
कोरोना काल में मातम-पुर्शी – २
तो आते हैं मेरी परसों वाली मातम-पुर्शी की कहानी पर। एक दिन कहीं मातम में जाने का बुलावा आ गया। गाँव वालों ने मिलकर एक Trax बुक कर ली। जब मैं गाड़ी के पास पहुँचा तो देखा गाँव के काफी बुज़ुर्ग भी मातम में जाने...
कोरोना काल में मातम-पुर्शी – १
हमारे गाँव में (शायद पूरे ऊपरी शिमला में) रिवाज़ है कि जब किसी व्यक्ति की रिश्तेदारी में कोई मृत्यु होती है तो वह व्यक्ती अपने पूरे गाँव वालों को बोलता है कि उन्हें उस व्यक्ती के परिवार के साथ शोक व्यक्त करने उस गाँव चलना...
कोरोना काल में थूकने की आदत – १
छैला (ठियोग) में मैंने 3-4 दिन पहले एक खाड़ू को डाँटा: भाई, पब्लिक में क्यूँ थूक रहा है? इतनी महामारी फैल रही है। मुझे आँखें दिखाता हुए बोला: चल चल आगे बढ़। सारी दुनिया थूक रही है, मेरे थूकने से बड़ा फैलेगा कोरोना। मैं डरा...
Dilli Police
I remember, as a kid, there used to be this TVC: Dilli Police, Dilli Police… Why did DP require a communication initiative? To bridge the trust gap and change its imagery. But seems nothing has changed. Still, people don’t trust the police. Still, parents tell...
ज़िन्दा है निराला जी की पत्थर तोड़ने वाली औरत
निराला जी की पत्थर तोड़ने वाली औरत को आज घर जाना नसीब हुआ है। वो कई सौ किलोमीटर का सफ़र पैदल चलना चाहती है। सरकार ने उसके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन लगाई है। परन्तु उसे पैदल चलना अधिक पसन्द है। जिन राजमार्गों पर उसने रेत,...
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